छत्तीसगढ़
CG BREAKING: रिश्वतखोरी मामले में सेवानिवृत्त बाबू को 3 वर्ष की सजा
Shantanu Roy
4 Jun 2026 11:22 PM IST

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एसीबी ट्रैप में हुआ था गिरफ्तार
Ambikapur. अंबिकापुर। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दर्ज रिश्वतखोरी के मामले में विशेष न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत्त सहायक ग्रेड-03 (बाबू) व्हीके सिन्हा को तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। यह निर्णय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गठित विशेष न्यायालय अंबिकापुर ने गुरुवार को सुनाया। मामले के अनुसार, ग्राम कटकोना निवासी शिकायतकर्ता लोचन सिंह ने 16 जुलाई 2020 को एसीबी अंबिकापुर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि उनके पिता लरघुराम जल संसाधन विभाग में चौकीदार के पद से 30 नवंबर 2015 को सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें केवल बचत निधि की राशि प्राप्त हुई थी, जबकि ग्रेच्युटी और पेंशन संबंधी प्रकरण विभाग में लंबित था।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि विभाग में पदस्थ सहायक ग्रेड-03 व्हीके सिन्हा ने लंबित पेंशन और ग्रेच्युटी प्रकरण का निराकरण कराने के एवज में पहले 3 हजार रुपये की राशि ली थी। इसके बाद उसने 8 हजार रुपये की अतिरिक्त रिश्वत की मांग की। इस पर पीड़ित ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई। एसीबी ने शिकायत का सत्यापन करने के बाद ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई। सत्यापन के दौरान दोनों पक्षों के बीच 7 हजार रुपये रिश्वत तय हुई। इसके बाद 13 अगस्त 2020 को एसीबी की टीम ने आरोपी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी को जल संसाधन विभाग कार्यालय के बाहर मुख्य सड़क पर गिरफ्तार किया गया था।
गिरफ्तारी के बाद मामले की विस्तृत जांच की गई और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर 22 जून 2021 को विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अंबिकापुर में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि सरकारी सेवा में रहते हुए पद का दुरुपयोग कर रिश्वत लेना गंभीर अपराध है और इससे जनता का विश्वास प्रभावित होता है। इसी आधार पर आरोपी को 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। एसीबी की इस कार्रवाई और अदालत के फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी ताकि सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
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